दिल्ली। साहित्य और शायरी की खूबसूरत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 17 मई को मुंबई से दिल्ली पधारे प्रसिद्ध शायर कृष्णा गौतम के सम्मान में एक भव्य साहित्यिक आयोजन ‘ग़ज़लों की शाम कृष्णा गौतम के नाम’ आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम अदबी माहौल, बेहतरीन ग़ज़लों और आत्मीय सम्मान समारोह के कारण देर रात तक यादगार बना रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर रवि ऋषि ने की, जबकि मंच संचालन सुप्रसिद्ध साहित्यकार अनिल मीत ने अपने प्रभावशाली और सधे हुए अंदाज़ में किया। उनके संचालन ने पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा और श्रोताओं को अंत तक बाँधे रखा।कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने शायर कृष्णा गौतम का गर्मजोशी से स्वागत किया। साहित्यकार जगदीश मीणा और गुरचरन मेहता रजत ने उन्हें मोतियों की माला और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर ट्रू मीडिया के संपादक ओमप्रकाश प्रजापति ने भी शॉल ओढ़ाकर उनका अभिनंदन किया। साहित्यिक सौहार्द और सम्मान की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जगदीश मीणा एवं गुरचरन मेहता रजत ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी शायरों को पटका भेंट कर सम्मानित किया। इस आत्मीय सम्मान ने पूरे आयोजन को पारिवारिक और आत्मिक ऊष्मा से भर दिया। महफ़िल में उपस्थित सभी शायरों ने अपनी-अपनी चुनिंदा और शानदार ग़ज़लों से समां बाँध दिया। जिन प्रमुख शायरों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी उनमें सर्वश्री रवि ऋषि, कृष्णा गौतम, अनिल मीत, ओमप्रकाश प्रजापति, प्रमोद शर्मा असर, जगदीश मीणा, गुरचरन मेहता रजत, मनोज कामदेव, अनिल मासूम, संजीव निगम, राजेंद्र प्रखर तथा डॉ. सुधीर त्यागी प्रमुख रूप से शामिल रहे। श्रोताओं ने विशेष रूप से कृष्णा गौतम की भावपूर्ण ग़ज़लों और उनके प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण की मुक्तकंठ से सराहना की। उनकी शायरी में जीवन के विविध रंग, रिश्तों की संवेदनाएँ और समाज की गहरी अनुभूतियाँ साफ़ झलकती रहीं, जिसने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान कई बार तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा। शायरों ने प्रेम, संवेदना, सामाजिक सरोकार और मानवीय रिश्तों पर आधारित अपनी रचनाओं से महफ़िल को यादगार बना दिया। साहित्यिक संवाद, आत्मीयता और आपसी सम्मान का यह संगम उपस्थित जनों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। अंत में जगदीश मीणा ने सभी उपस्थित शायरों, साहित्य प्रेमियों और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन साहित्य और ग़ज़ल की संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं तथा नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
