इस अवसर पर महाभारत कालीन महिलाएँ : शौर्य, द्वंद्व और प्रतिरोध विषय पर परिचर्चा हुई, जिसमें पिट्सबर्ग अमेरिका से पधारे सेतु के संपादक कार्यक्रम अध्यक्ष श्री अनुराग शर्मा* ने महाभारत काल की कुछ हद तक गुमनाम पात्र कृपी की चर्चा करते हुए उनके जीवन द्वंद्व पर विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के *मुख्य अतिथि इंडिया नेट बुक्स नोएडा के मालिक एवं सर्वाधिक किताबों के रचयिता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संजीव कुमार ने महाभारत काल के प्रसिद्ध नारी चरित्र गांधारी के बारे में बोलते हुए उनकी पतिव्रता की छवि के साथ उनके द्वारा लिए गए कुछ गलत निर्णयों के बारे में बताया।
कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉ. नीलिमा रंजन ने महाभारत की शौर्य, प्रतिरोध और प्रतिशोध से भरी पात्र अम्बा - शिखंडी की कुछ अनसुनी चारित्रिक विशेषताओं को बताया।
सारस्वत अतिथि डॉ. विनीता राहुरिकर ने महाभारत की प्रमुख पात्र द्रौपदी से जुड़ी प्रचलित धारणाओं और कहानियों को नकारते हुए उनके विद्वता,न्याय,नैतिकता,धीरता, साहस,वीरता और दृढ़ता से भरे व्यक्तित्व का चित्रण प्रस्तुत करते हुए उन्हें अपने पाँचों पतियों को एकता के सूत्र में बांधने वाली विवेकशील महिला के रूप में प्रस्तुत किया।
स्वागत वक्तव्य देते हुए अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच की संस्थापक अध्यक्ष आदरणीय संतोष श्रीवास्तव जी ने कहा -
इन दिनों प्रचुर मात्रा में महाभारत और रामायण कालीन चरित्र पर साहित्यकारों की कलम चल रही है लेकिन इन विषयों पर लिखते हुए बहुत सावधानी बरतनी चाहिए ताकि मूल कथा से भटके न और फिक्शन इतना अधिक न हो कि कथा नया रूप ले ले फिर वही फिक्शन वाली कथा आगे चलकर जब नई पीढ़ी पढ़ेगी तो उसी को सच मान लेगी । ऐसे में हमारे पौराणिक ग्रंथों की उपादेयता कम हो जाएगी।
कार्यक्रम का बेहद सफलता पूर्वक संचालन संस्था की निदेशक सुश्री महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने किया।
सुश्री नविता जौहरी ने मधुर स्वर में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
आभार उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष डॉ.साधना वैद ने किया।
विद्या सिंह, संतोष बंसल, शकुंतला मित्तल (अध्यक्ष दिल्ली इकाई),अर्चना पांडे (महासचिव दिल्ली इकाई), मृदुला मिश्रा (अध्यक्ष महाराष्ट्र इकाई),सत्यवती मौर्य (महासचिव महाराष्ट्र इकाई),शेफालिका श्रीवास्तव (अध्यक्ष मध्य प्रदेश इकाई) मधुलिका सक्सेना ,अनीता रश्मि, अंजू क्वात्रा, डॉ. प्रमिला वर्मा सहित
भारत के विभिन्न शहरों से साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्य बना दिया।
प्रस्तुति
-- महिमा श्रीवास्तव वर्मा
