गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने विवेकानंद हॉल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शहर की चार कवयित्रियों को सम्मानित किया। उन्हें गुलदस्ते, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान किये गये। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि महिलाओं को विनम्रता और पुरुषों के अहम को चोट न पहुंचाने की प्रवृत्ति ही प्रेम और सम्मान का हकदार बनाती है। उन्होंने अपनी नारी कविता के माध्यम से इस बात को साबित भी किया। इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका एवं संयोजक डॉ. अलका अग्रवाल ने शैक्षणिक संस्थानों की उस जिम्मेदारी पर बल दिया जिसके माध्यम से वे लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा दे सकते हैं तथा शिक्षा और अवसरों के माध्यम से युवा महिलाओं को सशक्त बना सकते हैं। उन्होंने बेटियां शीर्षक से एक कविता भी सुनाई। कवयित्रियों डॉ. माला कपूर, डॉ. निवेदिता शर्मा, डॉ. वंदना रायज़ादा और डॉ. तारा गुप्ता ने अपनी-अपनी कविताओं के जरिये महिलाओं के कर्तव्यों और अधिकारों को रेखांकित किया। वंदना रायजादा के माहिये व मुक्तक, डॉ. माला कपूर की छंदमुक्त कविता, डॉ. तारा गुप्ता और डॉ. निवेदिता शर्मा के गीतों ने महिलाओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को बहुत सुंदर तरीके से व्याख्यायित किया। उन्होंने अपने संबोधनों में महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता तथा समाज के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार साझा किये। इस अवसर पर विद्यार्थियों मीनू, गौरी त्यागी, रीतिका मेहरा, मान्या, नेहा आदि अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोहा। संचालन रंजना मिश्रा ने किया।
मेवाड़ में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर चार कवयित्रियां सम्मानित
March 09, 2026
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गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने विवेकानंद हॉल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर शहर की चार कवयित्रियों को सम्मानित किया। उन्हें गुलदस्ते, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न प्रदान किये गये। इस अवसर पर मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार गदिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि महिलाओं को विनम्रता और पुरुषों के अहम को चोट न पहुंचाने की प्रवृत्ति ही प्रेम और सम्मान का हकदार बनाती है। उन्होंने अपनी नारी कविता के माध्यम से इस बात को साबित भी किया। इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका एवं संयोजक डॉ. अलका अग्रवाल ने शैक्षणिक संस्थानों की उस जिम्मेदारी पर बल दिया जिसके माध्यम से वे लैंगिक संवेदनशीलता को बढ़ावा दे सकते हैं तथा शिक्षा और अवसरों के माध्यम से युवा महिलाओं को सशक्त बना सकते हैं। उन्होंने बेटियां शीर्षक से एक कविता भी सुनाई। कवयित्रियों डॉ. माला कपूर, डॉ. निवेदिता शर्मा, डॉ. वंदना रायज़ादा और डॉ. तारा गुप्ता ने अपनी-अपनी कविताओं के जरिये महिलाओं के कर्तव्यों और अधिकारों को रेखांकित किया। वंदना रायजादा के माहिये व मुक्तक, डॉ. माला कपूर की छंदमुक्त कविता, डॉ. तारा गुप्ता और डॉ. निवेदिता शर्मा के गीतों ने महिलाओं के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को बहुत सुंदर तरीके से व्याख्यायित किया। उन्होंने अपने संबोधनों में महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता तथा समाज के निर्माण में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार साझा किये। इस अवसर पर विद्यार्थियों मीनू, गौरी त्यागी, रीतिका मेहरा, मान्या, नेहा आदि अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोहा। संचालन रंजना मिश्रा ने किया।
