उज्जैन। डॉ अंशु जोशी का उपन्यास लाल दीवारें सफेद झूठ अनुभवजन्य और प्रामाणिक कृति है। यह उपन्यास शैक्षणिक संस्थानों के भीतर चलने वाली राजनीतिक और वैचारिक कशमकश को उजागर करता है। यह कथित बौद्धिक दावों और एजेंडों पर चोट करता है, जिन्हें अक्सर वैचारिकता की आड़ में परोसा जाता है। लेकिन वे कई बार युवाओं को धरातल के सत्य और राष्ट्रीय चेतना से परे ले जाते हैं। यह पुस्तक शिक्षा संस्थाओं में चलने वाली आंतरिक राजनीति और छद्म-वैचारिकता के व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव पर प्रकाश डालती है। समकालीन राजनीतिक-सामाजिक विमर्श से जोड़ते हुए लेखिका का उद्देश्य पाठकों को अकादमिक परिसरों में जारी राजनीति के पीछे की असलियत को समझने और बिना वैचारिक चश्मे के यथार्थ को देखने के लिए प्रेरित करना है।
ये विचार प्रेमचंद सृजन पीठ एवं सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन की हिन्दी अध्ययनशाला द्वारा जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज की प्रोफ़ेसर अंशु जोशी की सद्यः प्रकाशित पुस्तकों वैश्विक राजनीति 2025 एवं लाल दीवारें सफ़ेद झूठ के विमोचन के अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सम्राट् विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने व्यक्त किये।
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद् सदस्य शिक्षाविद श्री वरुण गुप्ता ने कहा कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम् की रही है और हमारी वैश्विक नीति भी इसी पर आधारित है। विभिन्न देशों के साथ रिश्तों में संवाद की सम्भावनाएँ हमेशा होना चाहिए। प्रो. अंशु जोशी की पुस्तकें हमारे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और देश की विदेश नीति में राष्ट्र प्रथम रखते हुए बराबरी के महत्व को प्रतिपादित करती हैं। विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय की आचार्य डॉ. दीपिका गुप्ता ने कहा कि आज की विदेश नीति सिर्फ हथियारों से नहीं होती बल्कि भौतिक संसाधनों पर एकाधिकार और साइबर हमलों के रूप में हो रही है और अंशु जी की पुस्तकें भारत के दृढ संकल्प को प्रदर्शित करती हैं।
विशेष अतिथि आचार्य डॉ. जगदीशचंद्र शर्मा ने कहा कि कोई भी विचारधारा अंतिम नहीं होती। वैचारिक पूर्वाग्रहों में बांध कर हम अखंड भारत का सपना साकार नहीं कर सकते। विशेष अतिथि डॉ. योगेश कुलमी ने कहा कि अंशु जी के व्यक्तित्व का पता उनके अद्भुत कृतित्व से चलता है। शैक्षिक संस्थानों में देश के प्रति प्रेम की अलख जगाने वाली प्रोफेसर अंशु जोशी का साहस सराहनीय है। डॉ. सीमा सोनी, देवास ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
प्रोफेसर अंशु जोशी ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली की राजधानी आरम्भ से ही अवन्तिका रही है। भारत को केंद्र में रखकर वैश्विक राजनीतिक घटनाओं का आकलन मेरी पुस्तकें करती हैं। मालवजन में सरलता है लेकिन जब वे पूर्वाग्रहों से लड़ते हैं तो पीछे नहीं हटते। वर्तमान दौर में जेएनयू विद्यार्थियों में राष्ट्रकेंद्रित दृष्टि को लाने में पर्याप्त प्रयास किए गए हैं।
स्वागत भाषण प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी ने देते हुए प्रो. अंशु जोशी को उज्जैन की बेटी बताते हुए उनके अवदान को रेखांकित किया। इस अवसर पर डॉ. अंशु जोशी को शॉल, श्रीफल एवं साहित्य भेंट कर उनका सारस्वत सम्मान अतिथियों ने किया। स्वागत कवि श्री सुरेन्द्र सर्किट, सुगनचंद जैन, संगीता तल्लेरा, सीमा देवेन्द्र जोशी आदि ने किया। आयोजन में वरिष्ठ कवि श्री अशोक भाटी, डॉ. वीरेंद्र चावरे, लक्ष्मीनारायण सिंहरोड़िया, डॉ महिमा मरमट आदि सहित बड़ी संख्या में शोधकर्ता एवं विद्यार्थी उपस्थित थे।
संचालन डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया और आभार शशांक दुबे ने व्यक्त किया।
25 जून 2026
मुकेश जोशी
सादर प्रकाशनार्थ निदेशक ,प्रेमचंद सृजन पीठ
