कटरा 21 जुलाई:~"सही मायने में तपस्या जंगलों में नहीं बल्कि अपने घर परिवार में ही जानिए" यह संदेश दिया गया स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज द्वारा कश्मीर रोड नल्लैया कटरा स्थित श्री राजमाता जी आश्रम शनि मंदिर में गुरु पूर्णिमा संदर्भ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन साध संगत को।
सदगुरु राजदरबार के प्रबंधक राम वोहरा ने बताया कि स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज वृंदावन से कथाव्यास आचार्य प्रेमनिधि जी द्वारा ध्रुव चरित्र,प्रहलाद चरित्र एवम राजा बलि और वामनावतार प्रसंगों पर चर्चा की।इन्ही विषयों पर तत्वज्ञान देते हुए स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज द्वारा आशीर्वचन देते हुए कहा कि " वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तपस्या जंगल में नहीं बल्कि समाज में जानिए"
वन में एकांत में शांत रहना सरल है, परंतु असली तप तो समाज के बीच रहकर अपने मन पर नियंत्रण रखना है।
जहाँ अपमान,आलोचना, विरोध या अशांति मिलने की संभावना हो,वहाँ से भागिए मत। ऐसे अवसरों को आत्मसाधना का माध्यम बनाइए। हर बार स्वयं से कहिए— "परिस्थितियाँ कैसी भी हों, मुझे अपने मन को विचलित नहीं होने देना है।"
धीरे-धीरे मन परिस्थितियों में आपको विचलित करने की जगह आपका आज्ञाकारी,प्रेमी सेवादार सहयोगी सिद्ध हो जाएगा। यही मन पर विजय है और यही श्रेष्ठ तप है।
"जंगल का तप शरीर को तपाता है,समाज का तप शूरवीर बनाता है।
प्रहलाद हिरण्यकश्यप प्रसंग पर शिक्षा देते हुए कहा कि "किसी भी इच्छा के लिए या भगवद प्राप्ति हेतु भी हठ,जिद अच्छी नही होती बल्कि मनुष्य को सहज भाव से रहना चाहिए।जिद हठ करके अगर कुछ प्राप्त कर भी लिया जाए तो क्या निश्चित है कि जो चीज हमने हठ करके प्राप्त की है क्या वह हमारे लिए सुखदाई ही होगी जबकि दूसरी तरफ अगर हम सहज योग के मार्ग पर अग्रसर होते हैं तो यह पक्का है कि हमे जो प्राप्त होगा हम उसी में से कोई न कोई खुशी ज्यादा खोज ही लेंगे।हिरण्यकश्यप ने हठ योग करके हर तरह से मृत्यु से बचाव के रास्ते मांग लिए लेकिन क्या मृत्यु से बच गया?दूसरी तरफ प्रहलाद सहज स्वभाव से हर हाल में भगवान की राज़ी मानकर आगे बढ़ता रहा और धर्म अर्थ काम मोक्ष सभी कुछ पा लिया।
स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने बच्चों को शिक्षा देने के उद्देश्य से कहा कि बच्चों को सिर्फ शिक्षा ही नहीं बल्कि संस्कारों के साथ ध्रुव,प्रहलाद, गुरु गोविंद सिंह जी के बच्चों की कुर्बानी की कथाएं सुनाते हुए उन्हें आधुनिकता से सिर्फ हेलो हाय नहीं बल्कि प्रेम त्याग,बांटने की शिक्षा देने से उनका ओर हमारा अपना भी भविष्य स्वयंमेव सुरक्षित होगा।
कथावाचक आचार्य प्रेमनिधि जी ने कहा कि "हर व्यक्ति के जीवन में एक तरफ रुचि आकर्षित करती है तो दूसरी तरफ नीतिगत निर्णय लेने से समाज में यश प्रतिष्ठा आदि की बढ़ोतरी होती है। जो व्यक्ति रुचिगत फैंसले लेते हैं वह अशांत,परेशान हो जाते हैं दूसरी तरफ जो रुचि से पहले नीतिगत निर्णय लेने की दिशा में कार्यरत रहते हैं वह स्वयं की उन्नति के साथ समाज को भी प्रेरणा प्रदान करते है।
आज श्रीमद्भागवत पुराण जी पूजा,आरती,प्रसाद वितरण एवम सदगुरु देव की आरती को दिल्ली निवासी नीलम अरोड़ा जी द्वारा सम्पन्न कराया गया।
