नयी दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और अन्य विरोध प्रदर्शनों को कवर करने के दौरान दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने व भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान कई जगह कई पत्रकारों को हिरासत में लिया, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन (पीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की तीखी आलोचना की है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और प्रेस की स्वतंत्रता को भी इसी अनुच्छेद का हिस्सा माना गया है। यह कानून पत्रकारों के रिपोर्टिंग करने, सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने के अधिकार की रक्षा करता है।
श्री बच्चन ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले ही स्पष्ट किया था कि प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों और वकीलों को उनके पेशेवर दायित्वों को निभाने से नहीं रोका जाना चाहिए। इसके बावजूद प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ शनिवार और रविवार को कई पत्रकारों को हिरासत में लिया गया। कई पत्रकारों के साथ बदसलूकी की खबरें आईं। कुछ पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की गई और कुछ को अलग-अलग जगहों पर प्रोटेस्ट को कवर करने के दौरान हिरासत में लिया गया। लोकतंत्र के लिए यह अच्छी बात नहीं है। पुलिस की प्रेस के साथ यह ज्यादती है।
बता दें कि जिन प्रमुख पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था, उनमें न्यूज़लॉन्ड्री के अश्विनी कुमार सिंह, आस्था सव्यसाची के अनमोल प्रीतम, स्क्रॉल (Scroll) के आयुष तिवारी, शोएब दानियाल, नवभारत टाइम्स के पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता, यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह, ध्रुव राठी, ऑल्ट न्यूज़ की किंजल, स्वतंत्र पत्रकार निधि सुरेश और एम. राजशेखर समेत कई दूसरे पत्रकारों के नाम भी शामिल हैं।

