नयी दिल्ली,बुधवार 09 सितंबर 2026.
उद्भव फाउंडेशन (अंतरराष्ट्रीय संस्था) द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में देश के बारह प्रख्यात प्रोफ़ेसरों, प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रीय पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया। इस अवसर लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ.अरण प्रकाश ढौंडियाल की दो नवीनतम अंग्रेज़ी पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन एवं मंचस्थ विद्वानों को शाल, पुष्पहार एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान के साथ हुआ। विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक के. पांडेय (शिक्षाविद् एवं शिक्षा पर उत्कृष्ट पुस्तकों के रचनाकार) ने डॉ. अरुण प्रकाश ढौंडियाल की दो पुस्तकों ('फेयरी ऑफ़ बैंग्लो' तथा 'क्वीन ऑफ़ सैगटम), कहानियों तथा उपन्यास का समग्र परिचय अपने सारगर्भित शब्दों में कराते हुए समसामयिक संदर्भों में जोड़कर कहा कि समाज में स्त्रियों की परिस्थितियाँ विचित्र हैं, उन्हें अपने संस्कारों और कठिन परिश्रमों के द्वारा अभीष्ट गंतव्य तक पहुँचना होता है। इस कार्य में यदा-कदा कुछ सद्पुरुषों द्वारा सहायता करते देखा जा सकता है। ठीक इसी प्रकार पुरुष जब दिशाविहीन होने लगता है तो स्त्री उसे सन्मार्ग पर ले जाती दिखायी देती है। उन्होंने कहा डॉ० ढौंडियाल की इन दोनों पुस्तकों में यही तथ्य अत्यन्त प्रभावी है।
डॉ.अरुण प्रकाश ढौंडियाल ने कहा कि शिक्षा विभाग में कार्य करते हुए शिक्षकों द्वारा व्यवस्था के सभी कार्यों को पूरा किया जाता है और वे सफलतापूर्वक पठन-पाठन भी करते हैं। इसीलिए ऐसे कार्यक्रमों में शिक्षकों को समाज और उनके छात्र-छात्राओं द्वारा सर्वोच्च आदर दिया जाता रहा है। हंसराज कॉलेज की प्राचार्या डॉ. रमा ने वर्तमान युवा पीढ़ी के प्रति चिंता जताते हुए कहा कि उनको दिशा-निर्देश करने वाली ऐसी संस्थाएं जिनमें परिवार और विद्यालय भी आता है अपनी व्यस्तता में भावी पीढ़ी को मोबाइल इत्यादि तकनीकी साधनों के हवाले किए जा रही हैं।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफ़ेसर (डॉ.) रमा ने साहित्यकार-कवि और कार्यक्रम के संयोजक डॉ. विवेक गौतम का अभिनंदन भी किया।
विशिष्ट अतिथि नेशनल एक्सप्रेसवे संस्थापक संपादक, वरिष्ठ पत्रकार विपिन गुप्ता ने भारतीय संस्कृति के रक्षार्थ परंपरावादी गुरु प्रथा का काफ़ी हद तक समर्थन करते हुए अपने संक्षिप्त एवं गंभीर विषय को श्रोताओं के सम्मुख रुचिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया।
समारोह की मुख्य अतिथि लता गुप्ता (अध्यक्ष, दिल्ली राज्य महिला आयोग) ने अपने उद्बोधन में समाज से आग्रह और उम्मीद करते हुए कहा कि अपनी सभ्यता को संस्कृति से विलग न होने दिया जाए। उन्होंने आगे कहा कि 'उद्भव फाउंडेशन' ने एक ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु को इस कार्यक्रम में शामिल किया है जो कि बहुत सी समस्याओं के समाधान समर्थ है। यह बिंदु है 'संवाद से राष्ट्र निर्माण'।
यह एक ऐसा महत्वपूर्ण तथ्य है, संकेत है जो सभी उलझे हुए प्रश्नों के हल में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि जीवन में हम सभी इस मंत्र का पालन करें तो निश्चित ही अनेक समस्याओं पर सहजता, सरलता से विजय हासिल की जा सकती है।
कार्यक्रम के उद्घाटन कर्ता वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार डॉ.बी.एल. गौड़ ने वर्तमान समय में राष्ट्रद्रोही एवं उपद्रवी तत्वों से सावधान होने के लिए अपना सारगर्भित वक्तव्य में महत्वपूर्ण और सार्थक सार प्रस्तुत किया। युवाओं के नाम पर जो नकारात्मक और देशद्रोही तत्व तख्ता पलट का सपना देख रहे हैं वे परोक्ष रूप से देश को अस्थिर करने के प्रयास कर रहे हैं।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर 'उद्भव फाउंडेशन' द्वारा अखिल भारतीय सम्मान की श्रृंखला में सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन राष्ट्रीय सम्मान-2026 से जिन 12 शिक्षाविदों को सम्मानित किया उनमें प्रो. उमापति दीक्षित, प्रो.दर्शन पांडेय, प्रो. सदानन्द प्रसाद, डॉ . भगवती प्रसाद ध्यानी, डॉ.अनुराधा गुप्ता, अशोक कुमार भाटी, शिल्पी पिपिल, डॉ.विनीता आर्य, नितेश चौधरी, रितु आनन्द, चारु माहेश्वरी, कुमारी प्रीति थे
उद्भव फाउंडेशन के गरिमापूर्ण मंच के अंतर्गत संपन्न हुए इस भव्य कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कवि डॉ.विवेक गौतम द्वारा किया गया।
हंसराज कॉलेज सभागार में इस अवसर पर देश भर से आए विश्वविद्यालय और शिक्षा जगत के अनेक बड़े विद्वानों सहित बहुत से गणमान्य लोग उपस्थित थे जिनमें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.वीणा मित्तल, प्रवीण नागर, आभा चौधरी,विम्मी चोपड़ा, अमोल प्रचेता, प्रिधि चोपड़ा, एकता गौतम, अनंत प्रचेता, सुविधा शर्मा, दिल्ली हाई कोर्ट के अधिवक्ता राघव चोपड़ा, प्रो.रवि शर्मा, डॉ. अशोक कुमार, मीनाक्षी जटाना, डॉ.विजय कुमार मिश्र, सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता कवि जितेंद्र कुमार, पुष्पा सिन्हा,आई.पी.सिंह, शिक्षाविद् शांति गौतम, ओम प्रकाश गुगरवाल,अरविंद कुमार द्विवेदी, राजेंद्र गोयल, एन.के.झंवर, सुनील कुमार, के.सी. गौतम, ओंकारनाथ मिश्र, अवधेश तिवारी, रोटेरियन सुधीर सरदाना तथा राजेन्द्र पारचा प्रमुख थे।
