बरनाला, 19 जून, 2026:- ‘निरोगी तन, निर्मल मन और जागृत आत्मा’ के पावन संकल्प को साकार रूप देते हुए संत निरंकारी मिशन ‘अंर्तराष्ट्रीय योग दिवस’ के अवसर पर एक व्यापक योग एवं आध्यात्मिक चेतना अभियान का आयोजन कर रहा है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन आशीर्वाद एवं दूरदर्शी मार्गदर्शन में संचालित यह प्रेरणादायी अभियान मानव कल्याण, समग्र स्वास्थ्य और आत्मिक उत्थान की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
सतगुरु माता जी का प्रेरक संदेश - “स्वस्थ मन, सहज जीवन” इस सत्य को प्रतिपादित करता है कि जीवन की वास्तविक समृद्धि केवल शारीरिक स्वास्थ्य में नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक जागरूकता में निहित है। सतगुरु माता जी के अनुसार मानव शरीर परमात्मा की अनुपम देन है, जिसकी देखभाल और सुदृढ़ता व्यक्ति को अपने आध्यात्मिक, सामाजिक एवं मानवीय उत्तरदायित्वों का श्रेष्ठ निर्वहन करने में सक्षम बनाती है। यह अभियान योग को मात्र शारीरिक व्यायाम न मानकर, आत्मबोध, आंतरिक शांति, मानवीय एकता और विश्वबंधुत्व की भावना को विकसित करने वाली एक समग्र जीवन साधना के रूप में अपनाने का संदेश देता है।
बरनाला ब्रांच के संयोजक जीवन गोयल ने बताया कि इसी प्रेरणास्रोत भावना के अंतर्गत संत निरंकारी मिशन द्वारा रविवार, 21 जून 2026 को प्रातः 6:00 बजे भारतवर्ष के 1500 से अधिक केंद्रों पर एक साथ योग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसी लड़ी में बरनाला के के.सी.रोड स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में योग कैंप का आयोजन किया जा रहा है जहां योगाचार्य संजीव मितल के मार्गदर्शन में श्रद्धालु, सेवादल स्वयंसेवक एवं स्थानीय नागरिक उत्साहपूर्वक सहभागी बनेंगे।
इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित ‘अंर्तराष्ट्रीय योग दिवस’ की थीम ‘‘स्वस्थ आयु के लिए योग’’ है। यह संदेश हमें स्मरण कराता है कि वास्तविक स्वास्थ्य केवल रोगमुक्त शरीर का नाम नहीं, बल्कि मानसिक स्थिरता, भावनात्मक परिपक्वता, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरूकता का समन्वित स्वरूप है। इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए संत निरंकारी मिशन योग को जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और आत्मबोध का प्रभावी माध्यम मानकर समाज में जागरूकता का प्रसार कर रहा है।
वर्तमान समय की व्यस्त और चुनौतीपूर्ण जीवनशैली में संत निरंकारी मिशन द्वारा ऐसे जनहितकारी प्रयासों का मूल उद्देश्य लोगों को अपने सर्वांगीण कल्याण के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाकर स्वस्थ, संतुलित, ऊर्जावान एवं आनंदमय जीवन की ओर अग्रसर हो सकें।
