ओमप्रकाश प्रजापति
कुछ व्यक्तित्व समय की सीमाओं में नहीं बंधते। वे अपने युग से आगे चलकर आने वाली पीढ़ियों के लिए विचारों की ऐसी मशाल जला जाते हैं, जिसकी रोशनी वर्षों बाद भी समाज को दिशा देती रहती है। ऐसे ही युगद्रष्टा समाज सुधारक, चिंतक और लेखक थे संतराम बी.ए.। उनकी पुण्यतिथि केवल एक महान व्यक्तित्व को स्मरण करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन मूल्यों पर पुनर्विचार करने का भी समय है, जिनके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। जाति, छुआछूत, सामाजिक विषमता और रूढ़िवादिता के विरुद्ध उनका संघर्ष केवल लेखन तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक सामाजिक आंदोलन का रूप था। आज जब समाज तकनीकी रूप से अत्यंत विकसित हो चुका है, तब भी सामाजिक असमानता, वैचारिक कट्टरता और भेदभाव के अनेक रूप हमारे सामने मौजूद हैं। ऐसे समय में संतराम बी.ए. के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं। उन्होंने मनुष्य को उसकी जाति, धर्म या वर्ग से नहीं, बल्कि उसके कर्म, ज्ञान और मानवीय मूल्यों से पहचानने की बात कही थी। यह दृष्टि आज के लोकतांत्रिक और समावेशी समाज की भी आधारशिला है। संतराम बी.ए. का लेखन केवल साहित्य नहीं था, बल्कि सामाजिक चेतना का दस्तावेज था। उन्होंने कलम को परिवर्तन का हथियार बनाया और शब्दों को समाज सुधार का माध्यम। उनके लेखों और पुस्तकों में एक ऐसे भारत का स्वप्न दिखाई देता है, जहाँ समानता, शिक्षा और मानवता सर्वोच्च मूल्य हों। वर्तमान समय में जब सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर विचारों का तीव्र प्रवाह है, तब संतराम बी.ए. हमें यह भी सिखाते हैं कि विचार केवल व्यक्त करने के लिए नहीं, बल्कि समाज को बेहतर बनाने के लिए होने चाहिए। उनकी लेखनी में संवाद था, संघर्ष था और समाधान की तलाश भी।
उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करें, एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान दें, जहाँ किसी व्यक्ति का मूल्य उसकी जन्म-परंपरा से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, संवेदनशीलता और मानवता से तय हो। संतराम बी.ए. आज हमारे बीच भले ही शारीरिक रूप से उपस्थित न हों, लेकिन उनके विचार आज भी समाज की चेतना में जीवित हैं। वे एक नाम नहीं, सामाजिक जागरण की वह सतत धारा हैं, जो हर दौर में नई पीढ़ियों को समानता, विवेक और मानवीय गरिमा का संदेश देती रहेगी।
“जो कलम से समाज का अंधकार मिटाने निकला था,
वह आज भी विचारों के आकाश में दीपक बनकर जल रहा है।
संतराम बी.ए. को विनम्र श्रद्धांजलि।”
