गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस में “आधुनिक समाज में शिक्षा के बदलते आयाम” विषय पर आयोजित सेमिनार में 14 विद्यार्थियों ने विभिन्न उप-विषयों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिनमें विद्यार्थियों की तार्किक सोच, शोध क्षमता एवं वर्तमान शैक्षिक प्रवृत्तियों के प्रति जागरूकता स्पष्ट दिखाई दी। बीएड विभाग ने इसका संयोजन किया। उद्घाटन सत्र का संचालन तनु अग्रवाल ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में एनसीईआरटी के पूर्व प्रोफेसर प्रो. वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में प्राचीन काल से आधुनिक युग तक शिक्षा व्यवस्था में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया। उन्होंने समावेशिता, लचीलापन तथा शिक्षा में अनुकूलनशीलता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष बल दिया। संस्थान की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए अपने संबोधन में शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा ही संवेदनशील, जिम्मेदार एवं संस्कारित नागरिकों के निर्माण का आधार बन सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. गीता रानी ने सेमिनार की रूपरेखा बताते हुए शैक्षणिक उपयोगिता एवं आधुनिक शिक्षा के समक्ष उभरती चुनौतियों पर चर्चा की। सेमिनार में तकनीकी सत्र-1 का संचालन ज्योति कुमारी तथा तकनीकी सत्र-2 का संचालन मनीषा सिंघल ने किया। छात्र समन्वयक गरिमा ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि छात्र समन्वयक श्रुति त्यागी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। सेमिनार का सफल आयोजन संकाय समन्वयक डॉ. किरण जोशी एवं जैना सुशील के सहयोग से हुआ।
मेवाड़ में ‘आधुनिक समाज में शिक्षा के बदलते आयाम’ पर सेमिनार आयोजित
May 13, 2026
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गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आॅफ इंस्टीट्यूशंस में “आधुनिक समाज में शिक्षा के बदलते आयाम” विषय पर आयोजित सेमिनार में 14 विद्यार्थियों ने विभिन्न उप-विषयों पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिनमें विद्यार्थियों की तार्किक सोच, शोध क्षमता एवं वर्तमान शैक्षिक प्रवृत्तियों के प्रति जागरूकता स्पष्ट दिखाई दी। बीएड विभाग ने इसका संयोजन किया। उद्घाटन सत्र का संचालन तनु अग्रवाल ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में एनसीईआरटी के पूर्व प्रोफेसर प्रो. वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने उद्बोधन में प्राचीन काल से आधुनिक युग तक शिक्षा व्यवस्था में आए परिवर्तनों का विश्लेषण किया। उन्होंने समावेशिता, लचीलापन तथा शिक्षा में अनुकूलनशीलता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष बल दिया। संस्थान की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए अपने संबोधन में शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा ही संवेदनशील, जिम्मेदार एवं संस्कारित नागरिकों के निर्माण का आधार बन सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. गीता रानी ने सेमिनार की रूपरेखा बताते हुए शैक्षणिक उपयोगिता एवं आधुनिक शिक्षा के समक्ष उभरती चुनौतियों पर चर्चा की। सेमिनार में तकनीकी सत्र-1 का संचालन ज्योति कुमारी तथा तकनीकी सत्र-2 का संचालन मनीषा सिंघल ने किया। छात्र समन्वयक गरिमा ने कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि छात्र समन्वयक श्रुति त्यागी ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। सेमिनार का सफल आयोजन संकाय समन्वयक डॉ. किरण जोशी एवं जैना सुशील के सहयोग से हुआ।
