नई दिल्ली/एनसीआर। फाल्गुन की मस्ती और होली की उमंग के बीच आयोजित ट्रू मीडिया का भव्य होली मिलन समारोह साहित्यिक आत्मीयता, सांस्कृतिक गरिमा और परंपरागत सौहार्द का अद्भुत संगम बन गया। दिल्ली/एनसीआर से आए लगभग 30 प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने इस रंगारंग आयोजन में भाग लेकर वातावरण को रचनात्मक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन गरिमामय वातावरण में हुआ, जहाँ कवियों, लेखकों और संपादकों ने अपनी काव्य-पाठ, लघु वक्तव्यों और हास्य-व्यंग्य रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। होली के पारंपरिक गीतों और फाल्गुनी फाग की धुनों के बीच साहित्य और संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। समारोह की विशेषता रही सहभोज की व्यवस्था, जिसमें सभी साहित्यकारों ने साथ बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन ग्रहण किया। यह दृश्य भारतीय परंपरा की उस भावना को साकार कर रहा था, जहाँ भोजन केवल आहार नहीं, बल्कि आत्मीयता का माध्यम होता है। गुलाल के रंगों ने वातावरण को उल्लास से भर दिया, एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर सभी ने प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया।
समारोह का सबसे आकर्षक और चर्चित क्षण तब आया जब ओमप्रकाश प्रजापति (मुख्य संपादक, ट्रू मीडिया) ने पारंपरिक रीति से निम्बू-मिर्ची की माला के माध्यम से सभी साहित्यकारों की “नजर उतारी।” इस अनूठी पहल के पीछे उनका संदेश स्पष्ट था, “साहित्यकार समाज की चेतना के प्रहरी हैं, उनकी सृजनशीलता पर किसी नकारात्मकता की छाया न पड़े।” उपस्थित जनों ने इस परंपरा को भारतीय लोक-संस्कारों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि मन के विकारों को जलाकर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का अवसर है। ट्रू मीडिया द्वारा आयोजित यह होली मिलन समारोह साहित्यकारों के बीच संवाद, सहयोग और रचनात्मक एकता को और सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ। अंत में सभी ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मकता, जागरूकता और मानवीय मूल्यों का प्रचार-प्रसार करते रहेंगे। फाल्गुन की इस मधुर बेला में ट्रू मीडिया का यह आयोजन वास्तव में रंगों से अधिक रिश्तों को रंगने वाला उत्सव बन गया।
