आज दिनांक 11 दिसंबर 2025 को दिल्ली हैल्थ केयर कोआपरेटिव सोसायटी लि दिल्ली के तत्वावधान में जय श्री शारदा को आपरेटिव टी सी सोसायटी लि द्वारा अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस पर एक ओनलाइन वैबीनार का आयोजन किया गया। वैबीनार का शुभारंभ डॉ एम पी एस दांगी जी पूर्व उप शिक्षा निदेशक दिल्ली सरकार तथा डॉ रवि अम्बैस्ट जी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
अपने संबोधन में डा रवि अम्बैस्ट जी ने दिल्ली हैल्थ केयर कोआपरेटिव सोसायटी लि को अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए बधाई दी। श्री अम्बैस्ट जी ने बताया कि ग्लेशियर रूपी बर्फ की नदियां जीवन के लिए बड़ी उपयोगी है। ये मानवता को न केवल पीने के लिए शुद्ध जल प्रदान करते हैं बल्कि कृषि तथा ऊर्जा के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण संकेतक हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना तेजी से हो रहा है, जिससे समुद्र के स्तर में वृद्धि हो रही है और जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ रहा है।
ग्लेशियर पिघलने के प्रभाव:
- समुद्र स्तर वृद्धि: ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और क्षरण हो रहा है।
- जल संसाधन प्रभाव: ग्लेशियरों के पिघलने से जल संसाधनों पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कृषि, पेयजल और ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
- जीवविविधता प्रभाव: ग्लेशियरों के पिघलने से जीवविविधता पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कई प्रजातियों के आवास नष्ट हो रहे हैं
ग्लेशियर संरक्षण के उपाय:
- कार्बन उत्सर्जन कम करना: ग्लेशियरों को बचाने के लिए कार्बन उत्सर्जन कम करना आवश्यक है।
- अनुकूलन और मिटिगेशन: ग्लेशियरों के पिघलने के प्रभावों को कम करने के लिए अनुकूलन और मिटिगेशन रणनीतियों को लागू करना होगा।
- सहयोग और समर्थन: ग्लेशियर संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और समर्थन आवश्यक है
- कार्यक्रम में पूर्व विज्ञान शिक्षक श्री देवेन्द्र पाल सिंह दलाल, डॉ सरिता गुप्ता, प्राकृतिक चिकित्सा डॉ नीतू जैन एवं डॉ एम पी एस दांगी जी ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के आयोजक और दिल्ली हैल्थ केयर कोआपरेटिव के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र पाल सिंह सारन जी द्वारा सभी प्रतिभागियों का हृदय की गहराई से आभार व्यक्त किया गया।
