गाजियाबाद। देश के जाने-माने नाट्य निर्देशक अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव, अजय कुमार व आदित्य श्रीवास्तव द्वारा लिखित, परिकल्पित एवं अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित नाटक ‘सरफरोशी की तमन्ना’ का मंचन गाजियाबाद के आईएमएस यूनिवर्सिटी कैंपस में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से थर्टीन स्कूल ऑफ टैलेंट डेवलपमेंट ने किया। एक घंटा बीस मिनट की अवधि वाले इस नाटक में क्रांतिकारी अशफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह, सचिन्द्र सान्याल, मन्मथनाथ गुप्त आदि के नेतृत्व में 9 अगस्त 1925 को लखनऊ के पास काकोरी में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रांतिकारियों द्वारा ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटने के लिए पैसेंजर ट्रेन रोके जाने की ऐतिहासिक घटना को शानदार ढंग से मंचित किया गया। राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में हुए इस ऐतिहासिक और साहसिक कदम को नाटक में प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया गया। क्रांतिकारियों के चरित्र और उनके राष्ट्रभक्ति के जज्बे को सभी कलाकारों ने बखूबी प्रदर्शित किया। निर्देशक अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव ने पूरे नाट्य मंचन पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। अदालत में क्रांतिकारियों पर मुकदमे और बहस के दृश्य विशेष रूप से दर्शकों को प्रभावित करते हैं। क्रांतिकारियों की ओर से पैरवी कर रहे बैरिस्टर बी.के. चैधरी के रूप में प्रमोद शिशोदिया तथा सरकारी वकील जगत नारायण मुल्ला की भूमिका में आदित्य श्रीवास्तव का अभिनय काबिले-तारीफ रहा। क्रांतिकारियों के बीच लोकप्रिय जेलर चंपालाल की भूमिका में अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव ने भी विशेष छाप छोड़ी। नाटक में पारस ने पत्रकार, हवलदार और चंद्रशेखर आजाद, आकाश ने राजेंद्र नाथ लहरी, समाचार पत्र विक्रेता, निशांत ने सचिन्द्र नाथ सान्याल, राजीव ने बनवारी, अर्पित ने मन्मथ नाथ, निखिल ने रोशन सिंह, श्रेयस ने सचिन्द्र नाथ बख्शी एवं गवर्नर लॉर्ड रीडी, जैद ने मुकुंदी एवं इंस्पेक्टर जनरल, अक्षत ने अशफाक उल्ला खां तथा शिवम ने राम प्रसाद बिस्मिल की भूमिकाएं निभाईं। दीपाली जैन, हर्षिता और तरुणा ने भी अपनी भूमिकाओं से प्रभाव छोड़ा। प्रियांक, नीतू, तन्मय, इम्प्रीक, कोमल कुमार और सजल सहित अन्य कलाकारों ने भी दमदार अभिनय किया। पूरे नाटक में देशभक्ति का जज्बा बरकरार रहा। तकनीकी दृष्टि से भी नाटक बेहद मजबूत रहा। इसके दृश्य इतने जीवंत थे कि दर्शकों को ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे स्वयं उसी ऐतिहासिक काल में खड़े हों। अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव के कसे हुए निर्देशन में प्रत्येक कलाकार ने अपने किरदार में जान फूंक दी। सेट एवं लाइट डिजाइनर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से जुड़े किरण कुमार रहे। मंच संचालन रोजी श्रीवास्तव, संगीत निर्देशन डॉ. संकल्प श्रीवास्तव, मेकअप मुकेश झा, प्रॉपर्टी प्रभारी तरुणा पाल तथा अन्य कलाकारों और तकनीकी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नाटक की समाप्ति पर आयोजक राकेश छारिया ने अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव को बुके देकर सम्मानित किया। आईएमएस यूनिवर्सिटी में आयोजित इस नाटक को देखने के लिए शहर के प्रतिष्ठित रोटेरियन, पत्रकार, कवि और गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
