हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी एवम् डॉ.अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सामाजिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों का समागम-विमर्श एवं सम्मान समारोह डॉक्टर अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय के नालंदा सभागार में गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर की विभिन्न साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधियों, साहित्यकारों, संपादकों एवं संस्कृति-कर्मियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रशासनिक सेवा अधिकारी (आईएएस) डॉ० रश्मि सिंह, सचिव महिला एवम् बाल विकास विभाग, दिल्ली सरकार और विशिष्ट अतिथि के रूप में मीडिया शिक्षक, लेखिका एवं जेल सुधारक प्रोफेसर (डॉ.) वर्तिका नंदा मंचासीन हुई। हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक एवम् अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक कर्नल आकाश पाटील ने अतिथियों का पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्रम और स्मृति चिन्ह भेंट करके स्वागत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत के साथ हुआ। इसके पश्चात उद्घाटन सत्र में मंचासीन अतिथियों ने भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल सृजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदनशील, जागरूक और मानवीय बनाने की शक्ति भी है। इस दृष्टि से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच संवाद और सहयोग को निरंतर बढ़ाना समय की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि डॉ वर्तिका नंदा और मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि सिंह ने हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्था के प्रयास समाज में परिवर्तन ला रहे है।
समारोह में दिल्ली-एनसीआर में सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने वाली विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों तथा साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों को सम्मानित किया गया। सम्मानित अतिथियों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा गया कि साहित्यिक संस्थाएँ और पत्रिकाएँ रचनात्मक विचारों को समाज तक पहुँचाने, नए रचनाकारों को मंच देने तथा साहित्यिक विमर्श को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यकारों एवं संस्था प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि आज के बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में साहित्य और संस्कृति से जुड़े संगठनों के सामने अनेक नई चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों का सामना सामूहिक प्रयास, परस्पर सहयोग और रचनात्मक संवाद के माध्यम से ही किया जा सकता है।
भोजन अवकाश के बाद द्वितीय सत्र में आयोजित विमर्श में साहित्य, भाषा, समाज और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। वक्ताओं ने साहित्यिक पत्रिकाओं की बदलती भूमिका, नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने, भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन, सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार तथा विभिन्न साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए।
विमर्श में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि साहित्य और संस्कृति का भविष्य तभी अधिक सशक्त हो सकता है, जब संस्थाएँ एक-दूसरे के अनुभवों और संसाधनों को साझा करते हुए संयुक्त रूप से कार्य करें। विशेष रूप से युवाओं को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें रचनात्मक मंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष श्री सुधाकर पाठक ने कहा गया कि इस समागम का उद्देश्य केवल सम्मान प्रदान करना नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर की साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाकर सार्थक संवाद, सहयोग और समन्वय की नई परंपरा विकसित करना है। अकादमी भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से साहित्य, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्थाओं के बीच संपर्क को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र का संचालन सुश्री गरिमा संजय और श्री द्वारिका नाथ पांडेय ने तथा द्वितीय सत्र का संचालन श्री विनोद पाराशर एवम् श्री ध्रुव शिवहरे ने किया। श्री राजकुमार श्रेष्ठ द्वारा विषय विवर्तन तथा श्री विजय कुमार शर्मा जी द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम में हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी की सदस्या डॉ विनीता शर्मा एवं सुश्री प्रकाश कँवर की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, संस्थाओं के पदाधिकारियों, साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों, साहित्यकारों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समारोह का समापन साहित्य, भाषा और संस्कृति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता तथा भविष्य में मिलकर रचनात्मक कार्य करने के संकल्प के साथ हुआ।
(रिपोर्ट – द्वारिका नाथ पांडेय)
