नई दिल्ली। साहित्य, संस्कृति और कला का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब ‘लम्हें जिंदगी के’ संस्था के तत्वावधान में 2 मई 2026 को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के गीतांजलि सभागार में लेखिका डॉ. पूजा भारद्वाज की नवीन कृति ‘सुर संतोष पुंज’ का गरिमामय लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात लाभ्या ने सरस्वती वंदना और सानवी जैन ने काव्य पाठ से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। वान्या भट्ट के ओडिसी नृत्य ने सभागार में सौंदर्य और संस्कृति की छटा बिखेर दी, जिसे उपस्थित जनों ने सराहा। इस अवसर पर मंच पर प्रतिष्ठित साहित्यिक और सांस्कृतिक हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ ग़ज़लकार रेनू हुसैन उपस्थित रहीं। उनके साथ वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व आकाशवाणी दिल्ली के निदेशक श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी, साहित्यकारा श्रीमती ममता किरण, शिक्षाविद एवं साहित्यकार प्रो. रवि शर्मा, ट्रू मीडिया के संपादक श्री ओमप्रकाश प्रजापति, फिल्म अभिनेता श्री निशिकांत दीक्षित और प्रकाशक श्री प्रशांत अवस्थी मंच आसीन रहे, मंच का संचालन कवि सचिन परवाना ने किया। अतिथियों के करकमलों द्वारा ‘सुर संतोष पुंज’ का लोकार्पण एक भव्य क्षण बन गया, जिसमें तालियों की गड़गड़ाहट ने पूरे सभागार को गुंजायमान कर दिया। लेखिका डॉ. पूजा भारद्वाज ने मंचासीन अतिथियों को अंगवस्त्र, पौधा और उपहार भेंट कर सम्मानित किया, जो भारतीय परंपरा और सम्मान की भावना का प्रतीक रहा। अपने वक्तव्यों में सभी अतिथियों ने पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा और भावनात्मक गहराई की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘सुर संतोष पुंज’ केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न रंगों और अनुभूतियों का सजीव चित्रण है, जो पाठकों को आत्मिक शांति और चिंतन की ओर प्रेरित करता है। मनोज कामदेव ने अपने वक्तव्य में आशीर्वचन दिए, वरिष्ठ ग़ज़लकार रेनू हुसैन ने 'मैं सफ़र में हूं' लेखिका की कविता वाचन किया। इस साहित्यिक आयोजन में 50 से अधिक साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सर्वश्री ज्योति जुल्का, ईशा भारद्वाज, अशोक मधुप, पंकज भरद्वाज, रमा त्यागी, पूजा श्रीवास्तव, मनोज कामदेव, प्रेरणा सिंह, बबली सिन्हा, पुनीता सिंह, देवेन्द्र शर्मा, भूपेंद्र राघव, अनीता त्रिपाठी, कामिनी मिश्रा,चंद्रमणि मणिका, जितेंद्र जीत,डॉ अवधेश तिवारी,अवधेश कन्नौजिया, संतोष संप्रीति सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में लेखिका द्वारा सभी उपस्थित साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों को अपनी पुस्तक की प्रति एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे यह आयोजन केवल एक लोकार्पण समारोह न रहकर एक आत्मीय साहित्यिक उत्सव बन गया। यह आयोजन न केवल साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि इसने यह भी सिद्ध किया कि आज के दौर में भी साहित्य समाज को जोड़ने और संवेदनाओं को जीवित रखने का सशक्त माध्यम बना हुआ है।
