गाजियाबाद, 27 अप्रैल 2026:
काईट मानद विश्वविद्यालय ने 27 अप्रैल 2026 को अपने कैंपस में, एक प्रमुख शैक्षणिक और उद्योग इंटरफ़ेस कार्यक्रम “फार्मा मंथन –2026” का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नियामक विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों एवं फार्मेसी के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का विषय “दवा खोज, विकास एवं विनियमन में मानव-केंद्रित, एआई-संचालित एवं सतत दृष्टिकोण” रहा, जो फार्मास्युटिकल विज्ञान में इंडस्ट्री 5.0 के विकसित होते स्वरूप को दर्शाता है।
उद्घाटन समारोह में विशिष्ट गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें डॉ. मनोज गोयल, प्रो वाइस चांसलर, डॉ. आदेश कुमार पांडेय, निदेशक अकादमिक तथा डॉ. प्रीति चिटकारा, प्रमुख – जनसंपर्क एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध, काईट शामिल थीं। इनके दूरदर्शी नेतृत्व में संस्थान निरंतर शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं उद्योग-अकादमिक समन्वय को सुदृढ़ कर रहा है। डॉ. के. नागराजन, प्राचार्य, काईट स्कूल ऑफ फार्मेसी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान हेतु अंतर्विषयक अध्ययन एवं नवाचार आधारित शोध की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि संस्थान उभरती तकनीकों के अनुरूप भविष्य के सक्षम फार्मेसी पेशेवरों को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में विभिन्न नियामक, औद्योगिक एवं शोध क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विभु साहनी, चेयरमैन, फाइनेंस कमेटी, PCI, नई दिल्ली ने गुणवत्ता एवं रोगी सुरक्षा सुनिश्चित करने में नियामक ढांचे की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि श्री चेतन गुप्ता, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट – कॉर्पोरेट अफेयर्स, एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने उद्योग की अपेक्षाओं एवं कॉर्पोरेट उत्तरदायित्व पर अपने विचार रखे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री ए.के. प्रधान, पूर्व संयुक्त औषधि नियंत्रक, भारत सरकार ने दवा नियामक तंत्र एवं नीतिगत विकास पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। डॉ. रघु रंगास्वामी, सीईओ, मॉलिक्यूलर सॉल्यूशंस सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड ने दवा खोज एवं विकास में डिजिटल तकनीकों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम को और समृद्ध करते हुए डॉ. भुलन कुमार सिंह, मैनेजर, मेडिकल राइटिंग – ग्लोबल क्लीनिकल रिसर्च ऑपरेशंस, ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने वैज्ञानिक लेखन एवं क्लीनिकल डॉक्यूमेंटेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। श्री अखिलेश कुमार तिवारी, असिस्टेंट जनरल मैनेजर, फॉर्मुलेशन एवं डेवलपमेंट, मानवता अनुसंधान केंद्र, गुरुग्राम ने फॉर्मुलेशन विकास से जुड़ी चुनौतियों एवं नवाचारों पर अपने विचार साझा किए। डॉ. कैलाश मलिक, असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर (इंडिया), सीडीएससीओ, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने नियामक सुधारों एवं उनके प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की।
“फार्मा मंथन –2026” का सफल आयोजन समन्वयकों डॉ. प्रवीण के. दीक्षित एवं डॉ. ऋचा गोयल के कुशल नेतृत्व एवं समर्पित प्रयासों का परिणाम रहा, जिनकी देखरेख में कार्यक्रम का सुचारू संचालन सुनिश्चित हुआ।
यह कार्यक्रम ज्ञान-विनिमय का एक सशक्त मंच साबित हुआ, जिसने अकादमिक, उद्योग एवं नियामक संस्थाओं के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर 315 से अधिक विद्यार्थियों एवं 40 से अधिक संकाय सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की और फार्मास्युटिकल क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों एवं अवसरों को समझने का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि भविष्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास हेतु मानव-केंद्रित एवं तकनीक-संचालित दृष्टिकोण को अपनाना आवश्यक है, जो काईट के शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के विजन को सुदृढ़ करता है।
