नई दिल्ली। लोधी रोड स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित मेवाड़ यूनिवर्सिटी के नेशनल सेमिनार में आरएसएस के प्रमुख वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि नफरत से नफरत नहीं मिटेगी। घृणा से घृणा खत्म नहीं होगी। इसे मिटाने के लिए किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा। वह हम क्यों नहीं हो सकते हैं। क्यों इंतजार किया जाए कि वह पहले आएं। हम क्यों नहीं उस दिशा में बढ़ें। हमें ही पहल करनी होगी। ‘धार्मिक आशंकाओं के उन्मूलन के प्रयास’ विषय पर वे बतौर मुख्य वक्ता अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। सेमिनार में देश के विभिन्न धर्मों से ताल्लुक रखने वाले 21 विद्वानों ने इस विषय पर अपने सारगर्भित वक्तव्य दिये। अपने अमूल्य सुझाव भी प्रस्तुत किये। जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने खुलकर सराहा। कुल चार सत्रों में आयोजित इस सेमिनार का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के विद्यार्थियों ने सर्वधर्म प्रार्थना से सेमिनार की शुरुआत की। अपने स्वागत भाषण में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति डॉक्टर अशोक कुमार गदिया ने कहा कि समाज से भाईचारा खत्म हो चला है। लोग अपने-अपने धर्म के वृत्त में सिकुड़ते चले जा रहे हैं। आपसी संवाद खत्म हो चला है। कुछ व्यक्तियों के कृत्यों के आधार पर पूरी कौम या जाति को कटघरे में खड़ा करना कहीं से न्याय संगत नहीं दिखता। पूरी जाति या समुदाय को दोषी ठहराना मानवता की भावना के प्रतिकूल है। नफरत भड़काने वाले नारे और उग्र भाषण कभी एक सभ्य और सहिष्णु समाज की निशानी नहीं हो सकती। आपसी मतभेदों को दूर करने का एक तरीका साफ दिखता है। वह है-प्राथमिक स्तर पर ही सभी धर्म के बारे में सटीक और तथ्यात्मक जानकारी देना शुरू करना। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा ने कहा कि धर्म ईश्वर का बनाया नहीं है। यह तो मानव की निर्मित एक सकारात्मक सामाजिक व्यवस्था है। इसीलिए मेरा धर्म बड़ा और तेरा धर्म छोटा ऐसी बात करने वाला व्यक्ति अपनी छोटी मानसिकता का ही परिचय देता है। जरूरत तो इस बात की है कि लोग अपने धर्म की बात दूसरों को बताएं तथा दूसरे के धर्म की अच्छी बात खुद भी आत्मसात करें। इस्लामी विषयों के जानकार मौलाना कल्बे रुशैद रिजवी ने कहा कि जो रसूल को मानता है रसूल की नहीं मानता, अल्लाह को तो मानता है पर अल्लाह की नहीं मानता वह आतंकवादी नहीं बनेगा तो और क्या बनेगा। इसीलिए ’का’ को समझकर ’की’ की ओर यात्रा ही हर धर्म का मूल सार है। ईसाई धर्म के विद्वान एचडी थॉमस ने कहा कि धर्म हद से ज्यादा मानव पर हावी हो चला है। जिसकी वजह से लोग अब घुटन महसूस करने लगे हैं। जैन धर्म के विद्वान योग भूषण महाराज ने कहा कि स्वभाव ही धर्म है। हर प्राणी, वस्तु का अपना-अपना स्वभाव होता है। और वह भाव ही धर्म है। मानव का स्वभाव है-मानवता करुणा, सत्य, प्रेम, दया, क्षमा, अहिंसा आदि। यही उसका धर्म भी है। सिख धर्म के जानकार एवं स्कॉलर प्रोफेसर डॉक्टर दिलवर सिंह ने कहा कि मुझे समझ में ही नहीं आता कि मजहब के नाम पर इतनी लड़ाइयां ही क्यों हो रही हैं। जबकि सब एक ही बंदे से उपजे हैं, एक ही नूर की उपज हैं। फिर झगड़ा की गुंजाइश ही कहाँ बचती है। जरूर यह उन लोगों की कारगुजारियां हैं जो अपने धर्म से अपना धंधा चलाते रहना चाहते हैं। बौद्ध धर्म के विद्वान आचार्य येशी फुंत्सोक ने कहा कि आधुनिक शिक्षा आध्यात्मिक शिक्षा में मिलाकर दी जाए। समापन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व केन्द्रीय मंत्री और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के अध्यक्ष सलमान खुर्शीद ने कहा कि धर्म को समझने में जरूर कोई भूल हो जा रही है। कोई चूक है जिसका फायदा सांप्रदायिक टकरावों को जन्म दे रहा है। उसे भूल-चूक समझना होगा। समझकर उसे दूर करने की आवश्यकता है। अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि सबका धर्म एक है। धर्म अपने आपमें एकवचन है। लेकिन हर एक का धर्म अलग-अलग होता है। कैसे? एक ही धर्म के व्यक्ति में व्यापारियों का धर्म अलग है, जुलाहे का अलग, किसान का अलग, विद्यार्थी का अलग तो शिक्षक का अलग। मतलब अपने-अपने कार्य के धर्म तो अलग हो सकते हैं पर मानने वाले सभी एक ही धर्म को भी मान सकते हैं।
सेमिनार में मोहम्मद फैज खान, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के थियोलॉजी के प्रसिद्ध विद्वान डॉक्टर रेहान अख्तर, दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व अधिकारी डॉ. गीता सिंह, डॉक्टर शफकत खान, साहित्यकार अरविंद मंडलोई, डॉक्टर उमर इलियासी, सचिन बुधोलिया, उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आईएम कुदुसी, सुशील पंडित जैसे विश्व विख्यात विद्वानों ने धार्मिक आशंकाओं के उन्मूलन के प्रयास विषय पर अपने विचार प्रकट किये। मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की निदेशिका डॉ. अलका अग्रवाल ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। कुशल संचालन कवि एवं पत्रकार डॉ. चेतन आनंद ने किया। सभी विद्वानों को मेवाड़ विश्वविद्यालय की ओर से अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। नेशनल सेमिनार में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एस.वाई कुरैशी, मेवाड़ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के महासचिव सीए अशोक कुमार सिंघल, अर्पित माहेश्वरी, आशा गदिया, रियाज पतलू, इंजीनियर रमेश कुमार, सुसज्जित कुमार, टीके मलिक, प्रियंका, पिंकी, संदीप पांडेय, जतिन, तुषार मलिक आदि मौजूद रहे।
