जीव सेवक एवं लेखक संगठन में प्रांत स्तर की जिम्मेदारी निभा रहे सागर शर्मा का बयान! माघ मेला प्रशासन से की माफी की मांग!
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज को माघ मेला में स्नान करने में जो अवरोध उत्पन्न हुआ ये निंदा करते हुए कहा कि सनातन धर्म में सर्वोच्च पद पर विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य जी भगवान के साथ जो हुआ वह दुखद घटना है!
विषय है कि जब हम स्वयं को हिंदुत्व के संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करते हैं तो ये बात वास्तव में कितना सच है ये धरातल पर पता चलता है! सनातन धर्म ने केवल भारत बल्कि विश्व की सबसे प्राचीनतम संस्कृति है! और भगवान शंकर की अवतारकृत परंपरा जो 2500 साल से अधिक की जिसमें 4 मठ जो भारत की 4 दिशाओं में मौजूद हैं -
उत्तर दिशा में - ज्योर्तिमठ
पूर्व दिशा में - गोवर्धनमठ
पश्चिम दिशा में - शारदा पीठ
दक्षिण दिशा में - श्रृंगेरीमठ
इन सभी मठों में विराजमान शंकराचार्य सभी सनातनियों के लिए परमाराध्य एवं परम पूजनीय हैं! और माघ मेला प्रशासन के द्वारा ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को उनकी बग्घी के साथ प्रवेश नहीं दिया गया! ये वही बग्घी है जो 2024 में भी शंकराचार्य जी के द्वारा लाई गई थी! तो इसमें इस बार अव्यवस्था कैसे हुई और प्रशासन के द्वारा इससे नई परंपरा क्यों बताया गया? दंडी संन्यासियों को चोटी पकड़कर घसीटना घूसे लाट मारना ये अधर्म का कार्य हुआ है! जब VVIP लोगों की बड़ी बड़ी गाड़ियां प्रवेश कर सकती हैं तो बग्घी में ऐसा क्या था कि इसको रोक जाए! हम सभी के लिए सौभाग्य की बात की चारों शंकराचार्य हमारे मार्गदर्शन के लिए उपस्थित हैं! धर्म चलाना और धार्मिक निर्णय लेना शंकराचार्यों का विषय है!
ये विषय अब सनातन के सर्वोच्च पदपर विभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य के सम्मान की है! समय समय पर शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सनातन के पता को लहराने का काम किया है जैसे 2007 में उन्होंने अपने गुरु जगतगुरु स्वरूपानंद सरस्वती जो मौजूदा शंकराचार्य थी उनके नेतृत्व में राम सेतु केस में पौराणिक साक्ष्य कोर्ट में पेश किए थे!
2015 में वाराणसी के गोदौलियां चौक पर सपा के सरकार ने गणेश मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगाया था तब स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ओर उनके शिष्यों ने आंदोलन किया और सभी लाठी चार्ज की गई! और इस घटना के लिए अखिलेश यादव ने 2021 हरिद्वार में स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से क्षमा मांगी थी!
कुछ लोगों ने शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विरोधी बताया और उन्हें कांग्रेसी कहा पर ये बात बिल्कुल असत्य है! क्योंकि शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वो हैं जिन्होंने मोदी जी के लिए खुला प्रचार 2014 में किया था! और मोदी जी की जीत के बाद 2500 साड़ियां और देशी घी के 9 क्विंटल लड्डू मां गंगा को चढ़ाए थे और बड़ा उत्सव मनाया था! शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज किसी व्यक्ति एवं किसी राजनीतिक दल के समर्थक या विरोधी नहीं वो धर्म सम्राट हैं और उनका कार्य है मार्गदर्शन करना!
तो ये सब होने के बाद उन्हें किसी पार्टी का एजेंट कहना और उनपर उल्टे सीधी टिप्पणी करना ये अधर्म का कार्य होगा!
माघ मेला प्रशासन को शंकराचार्य जी के लिए विशेष व्यवस्था कर उन्हें शांतिपूर्वक सम्मानपूर्व स्नान करने देना चाहिए!
और जो घटना घटित हुई है इसके लिए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज जी से क्षमा मांगी लेनी चाहिए!
- सागर शर्मा - जीव सेवक एवं लेखक
