विगत दिन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ संजीव कुमार द्वारा करीब 300 से भी अधिक पुस्तकें लिखने और "इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में शामिल होने के मौके पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। अब डॉ संजीव कुमार जी का नाम 'इंडिया बुक बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में दर्ज हो गया है।
नई दिल्ली के मयूर विहार स्थित होटल
क्राउन प्लाजा में आयोजित इस सम्मान
समारोह में 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' के प्रतिनिधि नरविजय सिंह यादव ने डॉ संजीव कुमार को प्रमाण
पत्र, प्रतीक चिह्न और
मेडल पहनाकर सम्मानित किया।
इस विशेष मौके पर हिंदी साहित्य के
अपनी अपनी विधा के धुरंधर साहित्यकारों की उपस्थिति रही जिनमें चित्रा मुद्गल, ममता कालिया, प्रताप सहगल, प्रेम जनमेजय, अशोक चक्रधर और
दिविक रमेश उपस्थित रहे।
वरिष्ठ साहित्यकार चित्रा मुद्गल जी
अस्वस्थता के बावजूद समारोह में शामिल हुईं और बहुत कम लेकिन सारगर्भित शब्दों में
डॉ संजीव को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
वरिष्ठ कथाकार उपन्यासकार ममता
कालिया ने अपने बधाई संदेश में कहा कि डॉ संजीव जितने अच्छे इंसान हैं उतने ही
अच्छे साहित्यकार भी हैं। इन्होंने अनेक विषयों पर अपनी कलम चलाई है और लगातार लिख
रहे हैं जो बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि डॉ संजीव में कुछ कर दिखाने का एक जुनून
है जो उन्हें लिखने को उकसाती रहती है।
वरिष्ठ कवि अशोक चक्रधर ने बधाई देते
हुए कहा कि शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद सक्रिय लेखन कर रहे हैं यह विशेष रूप से
उल्लेखनीय है। उन्होंने छंदबद्ध कविता, छंदमुक्त कविता, नई कविता आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा करते
हुए डॉ संजीव के लेखन की सराहना की।
वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ प्रेम जनमेजय
ने डॉ संजीव के व्यंग्य विधा पर केंद्रित कई पुस्तकों के लेखन की प्रशंसा करते हुए
कहा कि व्यंग्य आलोचना पर एक साथ कई पुस्तकें लिखकर संजीव जी ने व्यंग्य विधा को
समृद्ध करने का काम किया है। उन्होंने इस अवसर पर बोलते हुए उनसे अपने आत्मीय और
पारिवारिक रिश्ते का भी उल्लेख किया।
वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल ने कहा
कि डॉ संजीव ने वैसे तो साहित्य सहित कानून जैसे विषय पर भी खूब लिखा है। उन्होंने
कहा कि इन सबसे बढ़कर पौराणिक पात्रों पर डॉ संजीव का लेखन बेजोड़ है। उन्होंने
उनकी कई पुस्तकों का भी उल्लेख किया।
वरिष्ठ कवि डॉ दिविक रमेश ने अपने आत्मीय
रिश्ते का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ संजीव के लेखन में विविधता है। उन्होंने कहा
कि साहित्य की अनेक विधाओं में और कानूनी विषयों पर दखल रखने के साथ साथ डॉ संजीव
ज्योतिष में भी निपुण हैं। उन्होंने 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में शामिल होने
पर बधाई दी।
इस विशिष्ट मौके पर साहित्य सेवी सुधाकर
पाठक जी, विनोद परासर जी, सविता चड्ढा जी, शकुन्तला मित्तल
जी, उमंग सरीन जी, आशा कुंद्रा जी, कल्पना मनोरमा जी, रजनी छाबड़ा जी, आलोक शुक्ल जी, प्रदीप शुक्ल जी, राघवेश अस्थाना
जी, सुशील त्रिवेदी
जी, रजनी छाबड़ा जी
और कामिनी मिश्रा जी ने भी संक्षेप में अपनी बात कही और डॉ संजीव के लेखन की
प्रशंसा करते हुए उन्हें बधाई दी।
इस अवसर पर प्रायः सभी वक्ताओं ने
डॉ संजीव कुमार जी की साहित्य साधना, उनके लेखन, जुनून, जज्बे और लगन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए
उनको बधाई दी। डॉ संजीव की इस साहित्य साधना में कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए
एवं उनका हौसला बनाए रखने के लिए मनोरमा जी सहित परिवार के अन्य सदस्यों की भी
सराहना की गई।
इस भव्य सम्मान समारोह में आए
विशिष्ट अतिथियों का स्वागत आदरणीया मनोरमा कुमार जी और कामिनी मिश्रा जी ने किया।
कार्यक्रम के कुशलतापूर्वक संचालन के
दायित्व का निर्वाह किया आपका मित्र रणविजय राव ने और धन्यवाद ज्ञापित किया इंडिया
नेटबुक्स की सीईओ मनोरमा कुमार जी ने।
इस मौके पर इंडिया नेटबुक्स के विनय
माथुर, शैली एवं स्टाफ
के अन्य सदस्यों सहित दिल्ली एनसीआर के कई साहित्यकार, पत्रकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा।
