प्रथम सत्र
साहित्य मंडल श्रीनाथ द्वारा द्वारा आयोजित"हिंदी लाओ देश बचाओ" समारोह श्री भगवती प्रसाद देवपुरा प्रेक्षागृह में देश भर से आए साहित्यकारों के बीच में शुरू हुआ। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति एवं साहित्यकार प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र ने कहा "जब तक हम विचारों में स्वाधीन नहीं होंगे, तब तक सतही परिवर्तन नहीं होंगे। आज लोगों को आपस में जुड़ने के लिए हिंदी से जुड़ना होगा। हिंदी को अपनाना होगा। आज हिंदी सिर्फ भाषा का प्रश्न नहीं है, यह हमारी पहचान है। यह हमारी संस्कृति है। यह हमारी एकता है।"
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उड़ीसा से पधारे प्रशासनिक अधिकारी एवं पूर्व कुल सचिव डॉ राजेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा "हिंदी सभी को जोड़ती है। मैं हिंदी से जुडा तो सबसे जुड़ा हूं ।हिंदी पढ़ने के कारण मैं आज यहां आ सका। भाषा सीखने से व्यक्ति का ज्ञान बढ़ता है ।हिंदी भाषा होने के बावजूद हमारी अपनी पहचान हिंदी है ।हिंदी होते ही हम अखिल भारतीय हो जाते हैं ।"
इस अवसर पर लखनऊ से पधारे विशिष्ट अतिथि डॉ ओम नीरव ने कहा " हम चाहते हैं कि हिंदी पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण हर क्षेत्र में अपनाई जाए तो इसके लिए सबसे पहले हमें दूसरी भाषाओं को भी उतना ही सम्मान देना पड़ेगा जितना हम हिंदी के लिए चाहते हैं।" डॉ ओम नीरव ने कहा "राजनीति को राष्ट्रभाषा नहीं बना सकते। यह कार्य सिर्फ साहित्यकार ही कर सकते हैं ।हिंदी का उत्थान और प्रसार तभी संभव है, जब हिंदी में पढ़ना, लिखना, अपनी विवशता हो जाए । "
दिल्ली से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राहुल हिंदी के उद्भव और विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा "सरकार आज स्वदेशी का प्रचार करने को कहती है, तो हमें सबसे पहले हिंदी को अपनाना है। हिंदी से ही हमें अपना सभी कार्य करने हैं ।"
अमलनेर महाराष्ट्र से पधारे सुरेश जी ने कहा "हिंदुस्तान को बनाने में शिवाजी ने तलवार का प्रयोग किया था। सभी को एकजुट किया था। अब यह कार्य साहित्यकारों को अपनी कलम से करना होगा। तभी हिंदी की विजय निश्चित है। "
इस अवसर पर पंजाब से पधारे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अमर सिंह बधान ने कहा "साहित्य मंडल एक चंदन का वृक्ष है , जो हर एक को अपनी महक बाँटता है। यह एक साहित्यिक संस्था ही नहीं है, यह प्रेम, सदाचार, उदारता, प्रेरणा , आत्मविश्वास जगाने वाली एक संस्था है। यहां हिंदी के साथ देश की समस्त भाषाओं का सम्मान होता है।"
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ अंजीव अंजुम की गणेश वंदना, श्रीनाथ वंदना, डॉ बृजभान नंदनी की सरस्वती वंदना, गुरुकुल विद्यालय के बालक बालिकाओं की गीता श्लोक के साथ शुरू हुई ।अतिथियों ने मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर डॉ व्यासमणी त्रिपाठी पोर्ट ब्लेयर द्वारा अंडमान निकोबार में हिंदी का समृद्धशाली इतिहास, श्रीमती मनोमाला हाजरिका जोरहाट, असम द्वारा पूर्वोत्तर राज्य में हिंदी के बढ़ते कदम ,डॉ अवधेश कुमार वर्धा, महाराष्ट्र द्वारा हिंदी लोकमंगल से लोग जागरण तक , डॉ एस प्रीति चेन्नई तमिलनाडु में तमिलनाडु में त्रिभाषा नीति की व्यापकता विषय पर हिंदी उपनिषद पढ़ा ।इस अवश्य पर प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र गाजियाबाद उत्तर प्रदेश को श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति सम्मान एवं हिंदी वाग्भूति कि मानद उपाधि एवं 11000 रुपए राशि, डॉ राजेंद्र प्रसाद मिश्रा उड़ीसा को श्री भगवती प्रसाद देवपुरा स्मृति सम्मान एवं हिन्दी शलाका की मानद उपाधि, डॉ कृष्ण लाल बिश्नोई बीकानेर राजस्थान को ब्रजकांत साहित्य सम्मान, आचार्य ओम नीरव लखनऊ उत्तर प्रदेश को डॉदाऊ दयाल गुप्ता स्मृति सम्मान, डॉ राहुल दिल्ली को श्री जीवन लाल अग्निहोत्री स्मृति सम्मान सहित उपाधियों सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हिंदी पुरुष श्री भगवती प्रसाद देवपुरा के कृतित्व पर आधारित साहित्य रत्न डॉक्टर राहुल की कृति दिव्यात्मा महाकाव्य का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर नृत्य शिरोमणि की मानवतावादी से आचार्य प्रोफेसर बृजभान नंदिनी वृंदावन उत्तर प्रदेश, डॉ नवल किशोर भाभडा अजमेर को श्रीमती सोनी देवी स्मृति सम्मान, डॉक्टर पुष्पा सिंह विसेन नई दिल्ली को श्रीमती कमलेश गुप्ता स्मृति सम्मान, श्री राजेश कुमार भटनागर जयपुर राजस्थान को श्री मूलचंद पारीक स्मृति सम्मान, डॉ श्याम मनोहर सिरोठिया सागर मध्य प्रदेश को श्री रामस्वरूप सिंगल स्मृति सम्मान, श्री शैलेश पांडेय भीनाश गुजरात को श्री सूरज केसरी फरक्या स्मृति सम्मान, डॉ अखिलेश निगम अखिल लखनऊ उत्तर प्रदेश को श्री अवध नारायण देवी उपाध्याय स्मृति सम्मान के साथ-साथ हिंदी काव्य शिरोमणि की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रधानमंत्री श्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने किया गद्य एवं पद्य परिचय का वाचन डॉअंजीव अंजुम द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री सुरेंद्र सार्थक ने हिंदी पर शानदार कविता पढ़कर तालियां बटोरी।
द्वितीय सत्र
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि डॉ नवल किशोर भाभडा ने कहा "यह कार्यक्रम साहित्य का महाकुंभ है। यह हिंदी को दिशा प्रदान करने वाला एक मंच है। यहां मैंने साहित्य का जन्म, संवर्धन और संरक्षण देखा है। "हिंदी लाओ देश बचाओ" कार्यक्रम एक आंदोलन के रूप में साहित्य मंडल की देन है।" कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के सचिव डॉ बसंत सिंह सोलंकी ने कहा "साहित्य मंडल हिंदी भाषा और साहित्य के विकास का एक वह मंदिर है, जहां का हर कण हिंदी के गुणगान करता है। जहां साहित्य उपजता है और जहां साहित्य के वृक्षों का सम्मान होता है।" उन्होंने हिंदी के उत्थान के लिए साहित्य अकादमी की ओर से हर संभव सहयोग की बात भी की।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार डॉ कृष्ण जुगनू ने कहा "नाथद्वारा को विश्व में दो बातों से जाना जाता है। प्रथम यहां 230 तरह की मिठाइयां प्रतिदिन बनती हैं, एवं दूसरा साहित्य मंडल ।"उन्होंने साहित्य मंडल के विकास और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा "साहित्य मंडल ने सिर्फ किताबों को सजोंया ही नहीं है, यहां महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना भी हुई है। यहां संपादित सूर सागर और अष्टछाप के कवियों पर संपादित और संकलित ग्रंथ हिंदी साहित्य की विशेष धरोहर हैं। यह सिर्फ साहित्यकारों के लिए ही नहीं, यह शोध कार्य कर्ताओं के लिए अति महत्वपूर्ण है । इस अवसर पर डॉ कृष्ण चंद्र बिश्नोई, बीकानेर , डॉक्टर अखिलेश निगम, लखनऊ, एवं अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस कार्यक्रम का संचालन प्रधानमंत्री श्री श्याम प्रकाश देवपुरा ने किया।
द्वितीय दिवस
प्रथम सत्र
प्रथम सत्र में देश के 16 राज्यों से कार्यक्रम में उपस्थित हुए सभी शताधिक साहित्यकार, शहर के गणमान्य नागरिक एवं विविध विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने हाथों में हिंदी पर स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर " हिंदी लाओ, देश बचाओ" की शोभा यात्रा के द्वारा नगर परिभ्रमण किया। जिसमें बच्चों ने "हिंदी हमारी शान है हिंदी हमारी जान है"," हिंदी लाओ , अंग्रेजी भगाओ" जैसे नारे लगाते हुए लोगों को जागृत करने का कार्य किया ।यह रैली शहर के मुख्य मार्ग से होती हुई पुनः साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा के प्रांगण में समाप्त हुई। जिसका शहर के नागरिकों ने जगह-जगह स्वागत किया।
द्वितीय सत्र
साहित्य मंडल श्रीनाथ द्वारा द्वारा आयोजित"हिंदी लाओ देश बचाओ" समारोह के दूसरे दिन मुख्य अतिथि उप महानिरीक्षक, लखनऊ डॉ अखिलेश निगम ने कहा आज हिंदी का वर्चस्व है हिंदी विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा है हिंदी को सरकार का यदि संरक्षण और संवर्धन मिले तो यह विश्व में अंग्रेजी का स्थान ग्रहण कर सकती है आज हिंदी की राह में वही परेशानियां है जो भारतीय एकता की राह में है जो जातिवाद क्षेत्रवाद भाषावाद सांप्रदायिकता धर्म आदि भारतीय राष्ट्रीय एकता को विखंडित करने का प्रयास करते हैं यही समस्त तत्व हिंदी को भी नष्ट करने का प्रयास करते हैं।" इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अमर सिंह बधान में कहा "हिंदी को देश में लागू करने के लिए साहित्य मंडल संस्था का बड़ा योगदान रहा है। आज साहित्य मंडल भारत में अपनी खुशबू फैला रहे एक एक पुष्प को अपनी जमीन पर खिला रहा है। आज लगता है जैसे देश की सारी खुशबूएं हमारे बीच हैं। हमें महका रही हैं। साहित्य मंडल एक प्रेरक स्थल है यहां से हमें सिर्फ हिंदी को बचाने की ही प्रेरणा नहीं मिलती, अपितु अन्य भाषाओं के प्रति श्रद्धा का भाव भी पैदा होता है।"
इस अवसर पर संस्थान अध्यक्ष पंडित मदन मोहन शर्मा जी ने कहा "यह साहित्य मंडल का प्रयास है कि आज हिंदी भाषा की महत्ता को देखते हुए हिंदी के सौंदर्य का जो प्रदर्शन साहित्य मंडल में है, वैसा अन्यत्र कहीं नहीं होता। आज श्रोताओं के रूप में पूरा भारत देश साहित्य मंडल में उपस्थित है।"
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन कर हुई । सरस्वती वंदना एवं ब्रज वंदना के पश्चात प्रोफेसर बृजभान नंदिनी के नृत्य के साथ कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई। इस अवसर पर डॉक्टर बनवारी लाल पारीक नवल, डॉ रश्मि पांडा मुखर्जी कोलकाता ने अपना हिंदी उपनिषद पर वाचन किया ।साहित्य मंडल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय हिंदी कहानी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त श्रीमती नमिता सिंह आराधना ,द्वितीय स्थान डॉ अंजु सक्सेना, जयपुर , तृतीय स्थान श्रीमती शोभा रानी गोयल जयपुर सम्मान राशि एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर पुरस्कृत किया गया । इस अवसर पर जिंदगी की धूप छांव, तरकश के तीर, पंखुड़ी, अमृता प्रीतम के उपन्यास का आधुनिक अध्ययन, बदलाव विज्ञान पहेलियां का नवीन कृतियों का विमोचन भी किया गया।
इसके पश्चात पत्रकार प्रवीण की उपाधि से सुश्री किंजल तिवारी उदयपुर एवं रक्तदान वीर मानद उपाधि से वैशाली हितेश पांडा अहमदाबाद को सम्मानित किया गया । इस अवसर पर हिंदी भाषा काव्य विभूषण मानक उपाधि से विनय दास बाराबंकी, बृजनंदन प्रसाद वियोगी हुगली, सोमेंद्र कुमार पांडा कोलकाता, पूरणमल शर्मा पूर्ण निर्द्वंद्व भुसावर, डॉ कृष्णदेव अग्रवाल अरविंद दिल्ली, डॉ महेंद्र खरे सागर, डॉ कृष्णपाल सिंह भदोरिया अहमदाबाद, सुश्री शिवांगी सिंह कोटा, श्रीमती उपमा आर्य सहर लखनऊ, डॉ शिवकुमार ओझा बेंगलुरु, श्री महावीर सिंह जोधपुर, डॉ अंकुर देसाई बड़ौदा, पंडित हरिशंकर दुबे भोपाल, डॉक्टर शिवकुमार दीवान भोपाल, श्री शिवकुमार चंदन रामपुर, को अभिवंदित किया गया। इस अवसर पर हिंदी साहित्य भूषण विभूषण की मानद उपाधि से डॉ इंदु गुप्ता फरीदाबाद, डॉ एम एस चौहान इंदौर, श्री एम एल चतुर्वेदी इंदौर, अतुल कुमार शर्मा संभल ,काव्य भूषण की उपाधि से श्री संतोष कुमार पटेरिया महोबा, श्री राम मोहन कौशिक कोटा, श्री शरद कुमार गुप्ता आगरा, श्री रशीद अहमद शेख रशीद इंदौर, श्री दीनबंधु आर्य सरल लखनऊ, श्रीमती अर्चना भटनागर जयपुर, हिंदी भाषा विभूषण की मानद उपाधि से डॉ लक्ष्मी लाल बैरागी उदयपुर, श्री नवनीत पांडे बीकानेर , डॉ शशी रानी सहारनपुर, पत्रकार संपादक रत्न की मानद उपाधि से पवन गुप्ता तूफान झांसी, राज नारायण शर्मा चितौड़गढ़,, विजय कुमार गोयल आगरा एवं चिकित्सा संगीत शिक्षा सेवा रत्न की मानद उपाधि से वैद्य हंसराज चौधरी रायला , नीता निगम लखनऊ एवं सुमित्रा पालीवाल श्रीनाथद्वारा को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर हिंदी हुंकृति हिंदी हिंदुस्तान है का वाचन कवि रचनाकारों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के प्रधानमंत्री श्याम प्रकाश देवपुराने किया। सम्मानित साहित्यकारों के गद्य एवं पद्य परिचय का वाचन डॉ अंजीव अंजुम द्वारा किया गया।
