पूर्वी दिल्ली की श्रेष्ठ रामलीला श्री रामलीला कमेटी इन्द्रप्रस्थ द्वारा बच्चों को सनातन धर्म एवं रामायण के ज्ञान से परिचित कराने के उद्देश्य से बालक-बालिकाओं के मध्य ‘रामायण के महारथी कौन’ विषय पर क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता की प्रथम लिखित परीक्षा में विभिन्न विद्यालयों के 678 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। लिखित परीक्षा के बाद चयनित 25 प्रतिभागियों के मध्य द्वितीय एवं तृतीय चरण की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों ने रामायण से जुड़े प्रश्नों के अत्यंत आत्मविश्वास के साथ एवं ज्ञानपूर्ण उत्तर देकर उपस्थित दर्शकों एवं श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई कठिन प्रश्नों के उत्तर सुनकर दर्शक भी दाँतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए। कार्यक्रम का शुभारंभ लीला प्रबंध मंत्री श्री सचिन गर्ग ने सभी 25 प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित करते हुए किया। प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चों को दो-दो पुस्तकें भी भेंट की गईं, जिनसे उन्हें रामायण संबंधी प्रश्नों की तैयारी एवं उत्तर देने में सहायता मिली। कार्यक्रम की सफलता पर लीला प्रधान श्री सुरेश बिंदल ने क्विज मंत्री श्रीमती ज्योति गौतम, उप क्विज मंत्री श्रीमती अर्चना त्यागी एवं स्कोर व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली श्रीमती ललिता गोयन्का को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर निगम पार्षद शशि चांदना भी उपस्थित रही |
कार्यक्रम को सफल बनाने में लीला मंत्री श्री भूपेंद्र तिवारी, उप कार्यालय मंत्री श्री भारत भूषण गुप्ता, वाइस चेयरमैन श्री सुरेश मित्तल, उप मेला मंत्री श्री सागर गर्ग, प्रसाद मंत्री श्री प्रदीप पुष्प एवं उप प्रधान श्री संजय अग्रवाल, शिष्ठाचार मंत्री श्री बी.एम. अग्रवाल, निर्माण मंत्री श्री योगेन्द्र बंसल, प्रचार मंत्री विकास बंसल का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
प्रतियोगिता के विजेता
1. विवान कुमार — यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल
2. युवान अरोड़ा — यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल
3. डेनिश डेढ़ा — विवेकानन्द इंटरनेशनल स्कूल
4. सारा गांधी — नेशनल विक्टर पब्लिक स्कूल
5. अग्रिया त्रिपाठी — मेयो इंटरनेशनल स्कूल
6. सौम्या — एवीबी पब्लिक स्कूल
क्वीज का आखिरी राउंड 21 अक्टूबर 2026 को रामलीला महोत्सव में होगा और वही पर बच्चो को पुरुस्कार की धनराशि दी जाएगी | इन्द्रप्रस्थ रामलीला कमेटी का यह आयोजन बच्चों में रामायण, भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के प्रति ज्ञान, संस्कार और रुचि विकसित करने की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा।
