शिक्षा, साहित्य और कला के क्षेत्र में निरंतर नवाचार कर देश का नाम रोशन करने वाले वरिष्ठ शिक्षक, कवि, साहित्यकार एवं प्रसिद्ध रस्सी चित्रकार सुरेश पाल वर्मा 'जसाला' ने कुल 10 विश्व कीर्तिमान (5 वेब वर्ल्ड रिकॉर्ड एवं 5 लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड) अपने नाम कर एक नया इतिहास रच दिया है।
माता श्रीमती मूर्ति देवी एवं पिता श्री सियानन्द वर्मा के सुपुत्र, एम.ए., बी.एड. शिक्षित जसाला जी साहित्य और कला जगत में बहुमुखी प्रतिभा के धनी माने जाते हैं। उन्होंने अब तक कुल 38 पुस्तकें प्रकाशित की हैं। इसके अतिरिक्त, उनके द्वारा स्थापित नवीन साहित्य एवं कला विधाओं पर देश के विभिन्न हिस्सों से अन्य लेखकों की 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। अपनी उत्कृष्ट सेवाओं और उपलब्धियों के लिए उन्हें 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।
सुरेश पाल वर्मा 'जसाला' द्वारा स्थापित 10 प्रमुख विश्व कीर्तिमान:
1. विश्व की सबसे छोटी रचना: विधि-विधान सहित रचित सबसे छोटी कविता/रचना "मनका"।
2. कला में रस्सी का प्रथम प्रयोग: चित्रकला व हस्तशिल्प में रस्सी का अभिनव उपयोग।
3. 25 पुस्तकों का एक साथ विमोचन: 24 दिसंबर 2023 को एक साथ 25 पुस्तकों का विमोचन, जिसमें साहित्य की 5 और कला की 1 नई विधा शामिल रही।
4. सबसे लंबी समीक्षात्मक भूमिका: 'अथ से इति - वर्ण स्तम्भ' पुस्तक के लिए 41 पृष्ठों की समीक्षात्मक भूमिका।
5. विश्व का सबसे बड़ा झुमका: लकड़ी और प्लास्टिक पर रस्सी के कार्य से निर्मित 190 सेमी लंबा झुमका।
6. प्रधानमंत्री पर सबसे बड़ी पुस्तक: 'यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी' पर आधारित 38 इंच × 33 इंच (96 सेमी × 33 सेमी) आकार की विशालकाय पुस्तक।
7. नवीन विधाओं के जनक: कला और काव्य जगत में 6 नई विधाओं का सृजन —
* वर्ण पिरामिड (जसाला पिरामिड)
* सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक
* मनका (विश्व की सबसे छोटी काव्य विधा)
* मनका गीत
* चक्रण छंद (जसाला छंद)
* जसाला रस्सी आर्ट (कला क्षेत्र)
8. विश्व का सबसे बड़ा गले का हार: प्लाईवुड पर रस्सियों के माध्यम से तैयार 475 सेमी (187 इंच) लंबा भव्य हार।
9. विश्व का सबसे बड़ा माथे का टीका: लकड़ी पर रस्सी के काम से निर्मित 420 सेमी (165.3 इंच) लंबा आभूषण।
10. विश्व का सबसे बड़ा कान का बूंदा: लकड़ी व रस्सी के संयोजन से निर्मित 182 सेमी (72 इंच) लंबा आभूषण।
साहित्यिक नवाचारों और अद्भुत कलाकृतियों के माध्यम से सुरेश पाल वर्मा 'जसाला' जी ने यह सिद्ध कर दिया है कि लगन और कर्म के बल पर कला और साहित्य के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं।
