नई दिल्ली, 18 अप्रैल 2026 (शनिवार): दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज परिसर में आज ‘सुर साहित्य परिषद्’ के तत्वावधान में वार्षिकोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रातः 10:30 बजे से न्यू संगोष्ठी कक्ष में किया गया, जिसमें देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों, संस्थाओं एवं कवियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त व्यंग्यकार प्रो. हरीश नवल जी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में आकाशवाणी के पूर्व उपमहानिदेशक डॉ. लक्ष्मी शंकर बाजपेयी जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हंसराज कॉलेज की प्राचार्या प्रो रमा जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। नेपाल से पधारे विशिष्ट अतिथियों में आनंदी पंत जी, तारा पल्लवी जी, हेमबाबू लेखक जी एवं रमेश पंत ‘मीत बन्धु’ जी तथा दिल्ली से पधारी विशिष्ट अतिथि नीतू राय सिंह जी और नीतू जैन जी सहित कई साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इस शुभ अवसर पर सुर साहित्य परिषद् के संरक्षक डॉ जय सिंह आर्य, सलाहकार मुकेश शर्मा जी, सलाहकार सोनिया सोनम अक्स जी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी डॉ ओम प्रकाश प्रजापति जी, सह मीडिया प्रभारी सीमा रंगा जी , कोषाध्यक्ष अनुराधा पाण्डेय जी, महा सचिव नयन नीरज नायाब और सचिव ज्ञानेन्द्र प्रयागी ने उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम का संयोजन हंसराज कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. रवि गोंड एवं सुर साहित्य परिषद् की उपाध्यक्ष डॉ. उर्वी ऊदल ने किया।
प्रथम सत्र का संचालन सुर साहित्य परिषद् की कोषाध्यक्ष अनुराधा पाण्डेय जी अपने मनमोहक शैली और भारतीय परंपरा को समन्वित करते हुए किया। कार्यक्रम की शुरुआत सभी अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन करके किया गया। सरस्वती वंदना अनुराधा पाण्डेय जी अत्यंत सुरीले अंदाज में प्रस्तुत करके पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके उपरांत सुर साहित्य परिषद् के महा सचिव नयन नीरज नायाब जी ने शंख नाद करके कार्यक्रम का विधिवत आगाज किया।
सुर साहित्य परिषद् वर्षों की अपनी परंपरा को जारी रखते हुए पुरस्कारों की श्रेणी में इस वर्ष का " साहित्य भूषण सम्मान " वरिष्ठ साहित्यकार डॉ लक्ष्मी शंकर बाजपेई जी को दिया। जबकि नेपाल से पधारे साहित्यकारों को भारत - नेपाल मैत्री काव्य सम्मान से सम्मानित किया गया |
इसी क्रम में पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम भी संपन्न किया गया। जिसमें सुर साहित्य परिषद् के संस्थापक और अध्यक्ष डॉ संजय जैन जी की पुस्तक रामलीला मंचन तथा नेपाल से आए अतिथि साहित्यकार रमेश पंत ‘मीत बन्धु’ जी की नेपाली भाषा की पुस्तक भाकल का विमोचन किया गया। इन दोनों को पुस्तकों पर मंच द्वारा बहुत सकारात्मक विचार व्यक्त करते हुए काफी सराहना की गई।
इस बीच प्रख्यात चित्रकार शिव शंकर लोधी जी ने अपने हाथों से बने अतिथियों के स्केच भेंट किए जिसने डॉ लक्ष्मी शंकर पाठक जी, डॉ हरीश नवल जी और नेपाल से पधारी अतिथि तारा पल्लवी जी स्केच शमिल था।
बाल प्रतिभा पुरस्कार की श्रेणी में इस वर्ष सुर साहित्य बाल प्रतिभा का सम्मान बाल कवयित्री सानवी जैन को दिया गया। जिसके बाद इस बाल कवयित्री ने बहुत ऊर्जावान और मनमोहक अंदाज में काव्यपाठ प्रस्तुत किया जिससे पूरा सभागार वहां उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों एवं श्रोताओं की करतल ध्वनि से गुंजायमान हो गया।
वात्सल्य संस्था के छात्र छात्राओं ने एक नाटकीय मंचन किया। जिसने वर्तमान समय में बढ़ते आधुनिकरण में भी नई पीढ़ी में संस्कारों को संजोने एवं उसके महत्ता की बात पूरी सफलतापूर्वक रखी गई।
कार्यक्रम के दौरान साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभिन्न संस्थाओं को ‘सुर साहित्य रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इनमें राब्ता फाउंडेशन, हिन्दी साहित्य संस्थान, आगमन, वात्सल्य, लम्हे ज़िन्दगी के, विद्येश्वरी उड़ान सपनों की, बाल उत्सव रामलीला समिति, द्वारका क्वींस एवं कला मनस्वी मंच प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त सुर साहित्य सारथी सम्मान की श्रेणी में गोल्डी गीतकार ग़ज़ब जी, रघुवर दत्त शर्मा जी, अंजू शर्मा जी, अदिति अस्थाना जी, हंसराज कॉलेज के प्रोफेसर प्रभांशु ओझा जी और रवि कुमार गोंड जी को सम्मानित किया गया।
साहित्य के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने के लिए देश विदेश के चुनिंदा साहित्यकारों को संस्था ने सुर साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित किया। सुर साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित होने वाले योगेश कृष्ण जी, कुमार प्रभास जी, ज्योति जुल्का जी, आरती वर्मा जी, ऋतु रस्तोगी जी, पूजा श्रीवास्तव जी साहित्यकार शामिल रहे।
काव्य-पाठ, विचार-विमर्श और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष रूप से आकर्षक बना दिया।
सुर साहित्य परिषद् के संस्थापक एवं अध्यक्ष डॉ. संजय जैन ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि परिषद् का उद्देश्य साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना है।
जैसी कि संस्था की परंपरा है कि अपने टीम के जिस सदस्य का जन्मदिन शुभकामना संदेश देकर मनाया जाता है। इस माह सुर साहित्य परिषद् की कोषाध्यक्ष अनुराधा पाण्डेय जी जन्मदिन संस्था ने उन्हें शुभकामना संदेश भेंट कर और केक काटकर मनाया गया।
कार्यक्रम का समापन सुर साहित्य परिषद् के महा सचिव नयन नीरज नायाब द्वारा सबका धन्यवाद ज्ञान करके उत्साह और साहित्यिक ऊर्जा के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने इसे एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन बताया।
